देखो ,बाप ने हम से कैसी मुहब्बत की है कि हम ख़ुदा के फ़र्ज़न्द कहलाए ,और हम है भी |दुनिया हमें इसलिए नहीं जानती कि उसने उसे भी नहीं जाना | 'अज़ीजो! हम इस वक़्त ख़ुदा के फ़र्ज़न्द हैं ,और अभी तक ये ज़ाहिर नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे !इतना जानते हैं कि जब वो ज़ाहिर होगा तो हम भी उसकी तरह होंगे ,क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वो है | और जो कोई उससे ये उम्मीद रखता है ,अपने आपको वैसा ही पाक करता है जैसा वो पाक है | जो कोई गुनाह करता है ,वो शरीयत की मुख़ालिफ़त करता है; और गुनाह शरीयत ' की मुख़ालिफ़त ही है | और तुम जानते हो कि वो इसलिए ज़ाहिर हुआ था कि गुनाहों को उठा ले जाए ,और उसकी ज़ात में गुनाह नहीं | जो कोई उसमें क़ायम रहता है वो गुनाह नहीं करता ;जो कोई गुनाह करता है ,न उसने उसे देखा है और न जाना है | ऐ बच्चो !किसी के धोखे में न आना |जो रास्तबाज़ी के काम करता है ,वही उसकी तरह रास्तबाज़ हे | जो शख़्स गुनाह करता है वो शैतान से है, क्यूँकि शैतान शुरू' ही से गुनाह करता रहा है |ख़ुदा का बेटा इसलिए ज़ाहिर हुआ था कि शैतान के कामों को मिटाए | जो कोई ख़ुदा से पैदा हुआ है वो गुनाह नहीं करता ,क्यूँकि उसका बीज उसमें बना रहता है ;बल्कि वो गुनाह कर ही नहीं सकता क्यूँकि ख़ुदा से पैदा हुआ है | १०इसी से ख़ुदा के फ़र्ज़न्द और शैतान के फ़र्ज़न्द ज़ाहिर होते है |जो कोई रास्तबाज़ी के काम नहीं करता वो ख़ुदा से नहीं ,और वो भी नहीं जो अपने भाई से मुहब्बत नहीं रखता | ११क्यूँकि जो पैग़ाम तुम ने शुरू' से सुना वो ये है कि हम एक दूसरे से मुहब्बत रख्खें | १२और क़ाइन की तरह न बनें जो उस शरीर से था ,और जिसने अपने भाई को क़त्ल किया ;और उसने किस वास्ते उसे क़त्ल किया ?इस वास्ते कि उसके काम बुरे थे ,और उसके भाई के काम रास्ती के थे | १३ऐ भाइयों !अगर दुनिया तुम से 'दुश्मनी रखती है तो ताअ'ज्जुब न करो | १४हम तो जानते हैं कि मौत से निकलकर ज़िन्दगी में दाख़िल हो गए ,क्यूँकि हम भाइयों से मुहब्बत रखते हैं |जो मुहब्बत नहीं रखता वो मौत की हालत में रहता है | १५जो कोई अपने भाई से 'दुश्मनी रखता है , वो ख़ूनी है और तुम जानते हो कि किसी ख़ूनी में हमेशा की ज़िन्दगी मौजूद नहीं रहती | १६हम ने मुहब्बत को इसी से जाना है कि उसने हमारे वास्ते अपनी जान दे दी ,और हम पर भी भाइयों के वास्ते जान देना फ़र्ज़ है | १७जिस किसी के पास दुनिया का माल हो और वो अपने भाई को मोहताज देखकर रहम करने में देर करे ,तो उसमें ख़ुदा की मुहब्बत क्यूंकर क़ायम रह सकती है ? १८ऐ बच्चो! हम कलाम और ज़बान ही से नहीं, बल्कि काम और सच्चाई के ज़रिए से भी मुहब्बत करें | १९इससे हम जानेंगे कि हक़ के हैं ,और जिस बात में हमारा दिल हमें इल्ज़ाम देगा ,उसके बारे में हम उसके हुज़ूर अपनी दिलजम'ई करेंगे ; २०क्यूँकि ख़ुदा हमारे दिल से बड़ा है और सब कुछ जानता है | २१ऐ 'अज़ीज़ो! जब हमारा दिल हमें इल्ज़ाम नहीं देता ,तो हमें ख़ुदा के सामने दिलेरी हो जाती है ; २२और जो कुछ हम माँगते हैं वो हमें उसकी तरफ़ से मिलता है ,क्यूँकि हम उसके हुक्मों पर अमल करते हैं और जो कुछ वो पसन्द करता है उसे बजा लाते हैं | २३और उसका हुक्म ये है कि हम उसके बेटे ईसा' मसीह” के नाम पर ईमान लाएँ ,जैसा उसने हमें हुक्म दिया उसके मुवाफ़िक़ आपस में मुहब्बत रख्खें | २४और जो उसके हुक्मों पर 'अमल करता है,वो इसमें और ये उसमे क़ायम रहता है ;और इसी से या'नी उस रूह से जो उसने हमें दिया है ,हम जानते हैं कि वो हम में क़ायम रहता है |