१तुम में जो बुज़ुर्ग हैं, मैं उनकी तरह बुज़ुर्ग और मसीह के दुखों का गवाह और ज़ाहिर होने वाले जलाल में शरीक होकर उनको ये नसीहत करता हूँ | २कि ख़ुदा के उस गल्ले की गल्लेबानी करो जो तुम में है; लाचारी से निगहबानी न करो, बल्कि ख़ुदा की मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ ख़ुशी से और नाजायज़ नफ़े' के लिए नहीं बल्कि दिली शौक से | ३और जो लोग तुम्हारे सुपुर्द हैं उन पर हुकूमत न जताओ, बल्कि गल्ले के लिए नमूना बनो | ४और जब सरदार गल्लेबान ज़ाहिर होगा, तो तुम को जलाल का ऐसा सहरा मिलेगा जो मुरझाने का नहीं | ५ऐ जवानो ! तुम भी बुज़ुर्गों के ताबे' रहो, बल्कि सब के सब एक दूसरे की ख़िदमत के लिए फ़रोतनी से कमर बस्ता रहो, इसलिए कि “ख़ुदा मगरुरों का मुक़ाबला करता है, मगर फ़रोतनों को तौफ़ीक़ बख्शता है |” ६पस ख़ुदा के मज़बूत हाथ के नीचे फ़रोतनी से रहो, ताकि वो तुम्हें वक़्त पर सरबलन्द करे | ७अपनी सारी फ़िक्र उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारी फ़िक्र है | ८तुम होशियार और बेदार रहो; तुम्हारा मुख़ालिफ़ इब्लीस गरजने वाले शेर-ए-बबर की तरह ढूँढता फिरता है कि किसको फाड़ खाए | ९तुम ईमान में मज़बूत होकर और ये जानकर उसका मुक़ाबला करो कि तुम्हारे भाई जो दुनिया में हैं ऐसे ही दुःख उठा रहे हैं १०अब ख़ुदा जो हर तरह के फ़ज़ल का चश्मा है, जिसने तुम को मसीह में अपने अबदी जलाल के लिए बुलाया, तुम्हारे थोड़ी मुद्दत तक दुःख उठाने के बा'द आप ही तुम्हें कामिल और क़ायम और मज़बूत करेगा | ११हमेशा से हमेशा तक उसी की सल्तनत रहे | आमीन | १२मैंने सिल्वानुस के ज़रिये, जो मेरी दानिस्त में दियानतदार भाई है, मुख़्तसर तौर पर लिख़ कर तुम्हें नसीहत की और ये गवाही दी कि ख़ुदा का सच्चा फ़ज़ल यही है, इसी पर क़ायम रहो | १३जो बाबुल में तुम्हारी तरह बरगुज़ीदा है, वो और मेरा मरक़ुस तुम्हें सलाम कहते हैं | १४मुहब्बत से बोसा ले लेकर आपस में सलाम करो | तुम सबको जो मसीह में हो, इत्मीनान हासिल होता रहे |