सब महसूल लेनेवाले और गुनहगार उसके पास आते थे ताकि उसकी बातें सुनें | “ और आलिमों और फरीसी बुदबुदाकर कहने लगे, ““ये आदमी गुनाहगारों से मिलता और उनके साथ खाना खाता है |” उसने उनसे ये मिसाल कही , तुम में से कौन है जिसकी सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक गुम हो जाये तो निन्नानवे को जंगल मे छोड़कर उस खोई हुई को जब तक मिल न जाये ढूंढता न रहेगा? फिर मिल जाती है तो वो खुश होकर उसे कन्धे पर उठा लेता है, और घर पहुँचकर दोस्तों और पड़ोसियों को बुलाता और कहता है, 'मेरे साथ ख़ुशी करो, क्यूँकि मेरी खोई हुई भेद मिल गई |' मैं तुम से कहता हूँ कि इसी तरह निन्नानवे उसने उनसे ये मिसाल कही , रास्त्बाज़ों की निस्बत जो तौबा की हाजत नहीं रखते, एक तौबा करने वाले गुनहगार के बा'इस आसमान पर ज्यादा ख़ुशी होगी | “ ““या कौन ऐसी ““औरत है जिसके पास दस दिहरम हों और एक खो जाए तो वो चराग़ जलाकर घर में झाडू न दे, और जब तक मिल न जाए कोशिश से ढूंडती न रहे |” और जब मिल जाए तो अपनी दोस्तों और पड़ोसियों को बुलाकर न कहे, 'मेरे साथ ख़ुशी करो, क्यूँकि 'मेरा खोया हुआ दिरहम मिल गया |' १०मैं तुम से कहता हूँ कि इसी तरह एक तौबा करनेवाला गुनाहगार के बारे में खुदा के फरिश्तों के सामने ख़ुशी होती है |' ११“ फिर उसने कहा, ““किसी शख्स के दो बेटे थे |” १२उनमें से छोटे ने बाप से कहा, 'ऐ बाप ! माल का जो हिस्सा मुझ को पहुँचता है मुझे दे दे |'उसने अपना माल-ओ-अस्बाब उन्हें बाँट दिया| १३और बहुत दिन न गुज़रे कि छोटा बेटा अपना सब कुछ जमा' करके दूर दराज़ मुल्क को रवाना हुआ, और वहाँ अपना माल बदचलनी में उड़ा दिया | १४जब सब खर्च कर चुका तो उस मुल्क में सख्त काल पड़ा, और वो मुहताज होने लगा | १५फिर उस मुल्क के एक बाशिन्दे के वहां जा पड़ा | उसने उसको अपने खेत में खिंजीर चराने भेजा | १६और उसे आरज़ू थी कि जो फलियाँ खिंजीर खाते थे उन्हीं से अपना पेट भरे, मगर कोई उसे न देता था | १७फिर उसने होश में आकर कहा, 'मेरे बाप के बहुत से मज़दूरों को इफ़रात से रोटी मिलती है, और मैं यहाँ भूखा मर रहा हूँ | १८मैं उठकर अपने बाप के पास जाऊँगा और उससे कहूँगा, 'ऐ बाप ! मैं आसमान का और तेरी नज़र में गुनहगार हुआ | १९अब इस लायक नहीं रहा कि फिर तेरा बेटा कहलाऊँ | मुझे अपने मज़दूरों जैसा कर ले |' २०“ ““पस वो उठकर अपने बाप के पास चला | वो अभी दूर ही था कि उसे देखकर उसके बाप को तरस आया, और दौड़कर उसको गले लगा लिया और चूमा |” २१बेटे ने उससे कहा, 'ऐ बाप ! मैं आसमान का और तेरी नज़र मैं गुनहगार हुआ | अब इस लायक नहीं रहा कि फिर तेरा बेटा कहलाऊँ |' २२बाप ने अपने नौकरों से कहा, 'अच्छे से अच्छा लिबास जल्द निकाल कर उसे पहनाओ और उसके हाथ में अँगूठी और पैरों में जूती पहनाओ; २३और तैयार किए हुए जानवर को लाकर ज़बह करो, ताकि हम खाकर ख़ुशी मनाएँ | २४क्यूँकि मेरा ये बेटा मुर्दा था, अब ज़िन्दा हुआ; खो गया था, अब मिला है |' पस वो ख़ुशी मनाने लगे | २५“ ““लेकिन उसका बड़ा बेटा खेत में था | जब वो आकर घर के नज़दीक पहुँचा, तो गाने बजाने और नाचने की आवाज़ सुनी |” २६और एक नौकर को बुलाकर मालूम करने लगा, 'ये क्या हो रहा है? ' २७उसने उससे कहा, 'तेरा भाई आ गया है, और तेरे बाप ने तैयार किया हुआ जानवर ज़बह कराया है, क्यूँकि उसे भला चंगा पाया |' २८वो गुस्सा हुआ और अन्दर जाना न चाहा, मगर उसका बाप बाहर जाकर उसे मनाने लगा | २९उसने अपने बाप से जवाब में कहा, 'देख, इतने बरसों से मैं तेरी ख़िदमत करता हूँ और कभी तेरी नाफ़रमानी नहीं की, मगर मुझे तूने कभी एक बकरी का बच्चा भी न दिया कि अपने दोस्तों के साथ ख़ुशी मनाता | ३०लेकिन जब तेरा ये बेटा आया जिसने तेरा माल-ओ-अस्बाब कस्बियों में उड़ा दिया, तो उसके लिए तूने तैयार किया हुआ जानवर ज़बह कराया है' | ३१उसने उससे कहा, बेटा, तू तो हमेशा मेरे पास है और जो कुछ मेरा है वो तेरा ही है | ३२“ लेकिन ख़ुशी मनाना और शादमान होना मुनासिब था, क्यूँकि तेरा ये भाई मुर्दा था अब ज़िन्दा हुआ, खोया था अब मिला है' |""”