0^रोमियोंधन्यवाद की प्रार्थनासबने पाप किया हैतुम लोग भी पापी होयहूदी और व्यवस्थाकोई भी धर्मी नहींपरमेश्वर मनुष्यों को धर्मी कैसे बनाता हैइब्राहीम का उदाहरणविश्वास और परमेश्वर का वचनपरमेश्वर का प्रेमआदम और यीशुपाप के लिए मृत किन्तु मसीह में जीवितधार्मिकता के सेवकविवाह का दृष्टान्तपाप से लड़ाईमानसिक द्वन्द्वआत्मा से जीवनहमें महिमा मिलेगीपरमेश्वर का प्रेमपरमेश्वर और यहूदी लोगपरमेश्वर अपने लोगों को नहीं भूलापरमेश्वर धन्य हैअपने जीवन प्रभु को अर्पण करोशासक की आज्ञा मानोप्रेम ही विधान हैदूसरों में दोष मत निकालपाप के लिए प्रेरित मत करपौलुस द्वारा अपने पत्र और कामों की चर्चापौलुस की रोम जाने की योजनारोम के मसीहियों को पौलूस का संदेश