0^गिनतीइसराईलियों की पहली मर्दुमशुमारीख़ैमागाह में क़बीलों की तरतीबहारून के बेटेलावियों की मक़दिस में ज़िम्मादारीलावियों की मर्दुमशुमारीलावी के क़बीले के मर्द पहलौठों के एवज़ी हैंक़िहातियों की ज़िम्मादारियाँजैरसोनियों की ज़िम्मादारियाँमिरारियों की ज़िम्मादारियाँलावियों की मर्दुमशुमारीनापाक लोग ख़ैमागाह में नहीं रह सकतेग़लत काम का मुआवज़ाज़िना के शक पर अल्लाह का फ़ैसलाजो अपने आपको मख़सूस करते हैंइमाम की बरकतमक़दिस की मख़सूसियत के हदियेशमादान पर चराग़लावियों की मख़सूसियतरेगिस्तान में ईदे-फ़सहमुलाक़ात के ख़ैमे पर बादल का सतूनसीना पहाड़ से रवानगीमूसा होबाब को साथ चलने पर मजबूर करता हैअहद के संदूक़ का सफ़रतबएरा में रब की आगमूसा 70 राहनुमा चुनता हैमरियम और हारून की मुख़ालफ़तमुल्के-कनान में इसराईली जासूसलोग कनान में दाख़िल नहीं होना चाहतेकनान में क़ुरबानियाँ पेश करने का तरीक़ाफ़सल के लिए शुक्रगुज़ारी की क़ुरबानीनादानिस्ता गुनाहों के लिए क़ुरबानियाँदानिस्ता गुनाहों के लिए सज़ाए-मौतअहकाम की याद दिलानेवाले फुँदनेक़ोरह, दातन और अबीराम की सरकशीहारून की लाठी से कोंपलें निकलती हैंइमामों और लावियों की ज़िम्मादारियाँइमामों का हिस्सालावियों का हिस्सालावियों का दसवाँ हिस्सासुर्ख़ गाय की राखलाश छूने से पाक हो जाने का तरीक़ाचटान से पानीअदोम इसराईल को गुज़रने नहीं देताहारून की वफ़ातकनानी मुल्के-अराद पर फ़तहपीतल का साँपमोआब की तरफ़ सफ़रसीहोन और ओज की शिकस्तबलक़ बिलाम को इसराईल पर लानत भेजने के लिए बुलाता हैबिलाम की गधीबिलाम की पहली बरकतबिलाम की दूसरी बरकतबिलाम की तीसरी बरकतबिलाम की चौथी बरकतबिलाम के आख़िरी पैग़ाममोआब इसराईलियों की आज़माइश करता हैदूसरी मर्दुमशुमारीसिलाफ़िहाद की बेटियाँयशुअ को मूसा का जा-नशीन मुक़र्रर किया जाता हैरोज़मर्रा की क़ुरबानियाँसबत यानी हफ़ते की क़ुरबानीहर माह के पहले दिन की क़ुरबानीफ़सह की क़ुरबानियाँफ़सल की कटाई की ईद की क़ुरबानियाँनए साल की ईद की क़ुरबानियाँकफ़्फ़ारा के दिन की क़ुरबानियाँझोंपड़ियों की ईद की क़ुरबानियाँमन्नत मानने के क़वायदमिदियानियों से जंगलूटे हुए माल की तक़सीमदरियाए-यरदन के मशरिक़ी किनारे पर आबाद क़बीलेइसराईल के सफ़र के मरहलेतमाम कनानी बाशिंदों को निकालने का हुक्ममुल्के-कनान की सरहद्देंमुल्क तक़सीम करने के ज़िम्मादार आदमीलावियों के लिए शहरग़ैरइरादी ख़ूनरेज़ी के लिए पनाह के शहरएक क़बीले की मौरूसी ज़मीन शादी से दूसरे क़बीले में मुंतक़िल नहीं हो सकती