ऐ 'अज़ीज़ो! हर एक रूह का यक़ीन न करो ,बल्कि रूहों को आज़माओ कि वो ख़ुदा की तरफ़ से हैं या नहीं ;क्यूँकि बहुत से झूटे नबी दुनियाँ में निकल खड़े हुए हैं | ख़ुदा के रूह को तुम इस तरह पहचान सकते हो कि जो कोई रूह इक़रार करे कि ईसा' मसीह” मुजस्सिम होकर आया है,वो ख़ुदा की तरफ़ से है ; और जो कोई रूह ईसा' का इक़रार न करे ,वो ख़ुदा की तरफ़ से नहीं और यही मुख़ालिफ़-ऐ-मसीह की रूह है ;जिसकी ख़बर तुम सुन चुके हो कि वो आनेवाली है ,बल्कि अब भी दुनिया में मौजूद है | ऐ बच्चों! तुम ख़ुदा से हो और उन पर ग़ालिब आ गए हो , क्यूँकि जो तुम में है वो उससे बड़ा है जो दुनिया में है | वो दुनिया से हैं इस वास्ते दुनियाँ की सी कहते हैं ,और दुनियाँ उनकी सुनती है | हम ख़ुदा से है |जो ख़ुदा को जानता है ,वो हमारी सुनता है ; जो ख़ुदा से नहीं ,वो हमारी नहीं सुनता |इसी से हम हक़ की रूह और गुमराही की रूह को पहचान लेते हैं | ऐ अज़ीज़ों! हम इस वक़्त ख़ुदा के फ़र्ज़न्द है ,और अभी तक ये ज़ाहिर नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे !इतना जानते हैं कि जब वो ज़ाहिर होगा तो हम भी उसकी तरह होंगे,क्यूँकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वो है | जो मुहब्बत नहीं रखता वो ख़ुदा को नहीं जानता ,क्यूँकि ख़ुदा मुहब्बत है | जो मुहब्बत ख़ुदा को हम से है, वो इससे ज़ाहिर हुई कि ख़ुदा ने अपने इकलौते बेटे को दुनिया में भेजा है ताकि हम उसके वसीले से ज़िन्दा रहें | १०मुहब्बत इसमें नहीं कि हम ने ख़ुदा से मुहब्बत की, बल्कि इसमें है कि उसने हम से मुहब्बत की और हमारे गुनाहों के कफ़्फ़ारे के लिए अपने बेटे को भेजा | ११ऐ 'अज़ीज़ो !जब ख़ुदा ने हम से ऐसी मुहब्बत की, तो हम पर भी एक दूसरे से मुहब्बत रखना फ़र्ज़ है | १२ख़ुदा को कभी किसी ने नहीं देखा; अगर हम एक दूसरे से मुहब्बत रखते हैं ,तो ख़ुदा हम में रहता है और उसकी मुहब्बत हमारे दिल में कामिल हो गई है | १३चूँकि उसने अपने रूह में से हमें दिया है ,इससे हम जानते हैं कि हम उसमें क़ायम रहते हैं और वो हम में | १४और हम ने देख लिया है और गवाही देते हैं कि बाप ने बेटे को दुनिया का मुन्जी करके भेजा है | १५जो कोई इकरार करता है कि ईसा' ख़ुदा का बेटा है , ख़ुदा उसमें रहता है और वो ख़ुदा में | १६जो मुहब्बत ख़ुदा को हम से है उसको हम जान गए और हमें उसका यक़ीन है |ख़ुदा मुहब्बत है ,और जो मुहब्बत में क़ायम रहता है वो ख़ुदा में क़ायम रहता है ,और ख़ुदा उसमे क़ायम रहता है | १७इसी वजह से मुहब्बत हम में कामिल हो गई ,ताकि हमें 'अदालत के दिन दिलेरी हो; क्यूँकि जैसा वो है वैसे ही दुनिया में हम भी है | १८मुहब्बत में ख़ौफ़ नहीं होता ,बल्कि कामिल मुहब्बत ख़ौफ़ को दूर कर देती है; क्यूँकि ख़ौफ़ से 'अज़ाब होता है और कोई ख़ौफ़ करनेवाला मुहब्बत में कामिल नहीं हुआ | १९हम इस लिए मुहब्बत रखते हैं कि पहले उसने हम से मुहब्बत रख्खी | २०अगर कोई कहे ,“मैं ख़ुदा से मुहब्बत रखता हूँ “ और वो अपने भाई से 'दुश्मनी रख्खे तो झुटा है :क्यूँकि जो अपने भाई से जिसे उसने देखा है मुहब्बत नहीं रखता ,वो ख़ुदा से भी जिसे उसने नहीं देखा मुहब्बत नहीं रख सकता | २१और हम को उसकी तरफ़ से ये हुक्म मिला है कि जो ख़ुदा से मुहब्बत रखता है वो अपने भाई से भी मुहब्बत रख्खे |