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जासूस कनान को गए
यहोवा ने मूसा से कहा, “कुछ व्यक्तियों को कनान देश का अध्ययन करने के लिए भेजो। यही वह देश है जिसे मैं इस्राएल के लोगों को दूँगा। हर एक बारह परिवार समूह से एक नेता को भेजो।”
इसलिए मूसा ने यहोवा की आज्ञा मानी। उसने परान के रेगिस्तान से नेताओं को भेजा। ये उनके नाम
 
जककुर का पुत्र शम्मु—रुबेन के परिवार के समूह से,
होरी का पूत्र शापात—शिमोन के परिवार समूह से;
यपुन्ने का पुत्र कालेब—यहूदा के परिवार समूह से;
योसेप का पुत्र यिगास—इस्साकार के परिवार समूह से;
नून का पुत्र होशे—एप्रैम के परिवार समूह से;
रापू का पुत्र पलती—बिन्यामीन के परिवार समूह से;
10 सोदी का पुत्र गद्दीएल—जबूलून के परिवार समूह से;
11 सूसी का पुत्र गद्दी—मनश्शे के परिवार समूह से;
12 गमल्ली का पुत्र अम्मीएल—दान के परिवार समूह से;
13 मीकाएल का पुत्र सतूर—आशेर के परिवार समूह से;
14 वोप्सी का पुत्र नहूबी—नप्ताली परिवार समूह;
15 माकी का पुत्र गूएल—गाद के परिवार समूह से;
 
16 ये उन व्यक्तियों के नाम हैं जिन्हें मूसा ने प्रदेश को देखने और जाँच करने के लिए भेजा। (मूसा से नून के पुत्र होशे को दूसरे नाम से पुकारा। मूसा ने उसे यहोशू कहा।)
17 मूसा जब उन्हें कनान की छानबीन के लिए भेज रहा था, तब उसने कहा, “गेवेक घाटी से होकर पहाड़ी प्रदेश में जाओ। 18 यह देखो कि देश कैसा दिखाई देता है? और उन लोगों की जानकारी प्राप्त करो जो वहाँ रहते हैं। वे शक्तिशाली हैं? या कमजोर हैं? वे थोड़े हैं? या अधिक संख्या में हैं? 19 उस प्रदेश के बारे में जानकारी करो जिसमें वे रहते हैं। क्या यह अच्छा प्रदेश है? या बुरा? किस प्रकार के नगरों में वे रहते हैं क्या उन नगरों के परकोटे हैं क्या नगर शक्तिशाली ढगं से सुरक्षित है? 20 और प्रदेश के बारे में अन्य बातों की जानकारी प्राप्त करो। क्या भूमि उपज के लिए उपजाऊ है? या ऊसर है? क्या जमीन पर पेड़ उगे हैं? और उस भूमि से कुछ फल लाने का प्रयत्न करो।” (यह उस समय की बात है जब अंगूर की पहली फसल पकी हो।)
21 तब उन्होंने प्रदेश की छानबीन की। वे जिन मरुभूमि से रहोब और लेबो हमात तक गए। 22 वे नेगेव से होकर तब तक यात्रा करते रहे जब तक वे हेब्रोन नगर को पहुँचे। (हेब्रोन मिस्र में सोअन नगर के बसने के सात वर्ष पहले बना था।) अहीमन, शेशै और तल्मै वहाँ रहते थे। ये लोग अनाक के वंशज थे। 23 तब वे लोग एश्कोन की घाटी में आये उन व्यक्तियो ने अंगूर की बेल की एक शाखा काटी। उस शाखा में अंगूर का एक गुच्छा था। लोगों मेंसे दो व्यक्ति अपने बीच एक डंडे पर उसे रख कर लाए। वे कुछ अनार ओर अंजीर भी लाए। 24 उस स्थान का नाम एश्कोल की घाटी था। क्योंकि यह वही स्थान हैं जहाँ इस्राएल के आदिनियों में अंगुर के गुच्छे काटे थे।
25 उन व्यक्तियों ने उस प्रदेश की छानबीन चालीस दिन तक की। तब वे डेरे को लौटे। 26 वे व्यक्ति मूसा, हारून और अन्य इस्राएल के लोगों के पास कादेश में लौटे। यह पारान मरुभूमि में था। तब उन्होंने मूसा, हारून और सभी लोगों को, जो कुछ देखा सब कुछ सुनाया और उन्होंने उन्हें उस प्रदेश के फलों को दिखाया। 27 उन लोगों ने मूसा से यह कहा, “हम लोग उस प्रदेश में गए जहाँ आपने हमें भजा। वह प्रदेश अत्यधिक अच्छा है यहाँ दूध और मधु की नदियाँ बह रही हैं! ये वे कुछ फल हैं जिन्हे हम लोगं ने वहाँ पाया 28 किन्तु वहाँ जो लोग रहते हैं, वे बहुत शक्तिशाली और मजबूत हैं। उनके नगर बहूत विशाल हैं। हम लोगों ने वहाँ उनके परिवार के कुछ लोगों को देखा भी। 29 अमालेकी लोग नेगेव की घाटी में रहते हैं। हित्ती, यबूसी और एमोरी पहाड़ी प्रदेशों में रहते हैं। कनानी लोग समुद्र के किनारे और यरदन नदी के किनारे रहते हैं।”
30 तब कालेब ने मूसा के समीप के लोगों को शान्त होने को कहा। कालेब ने कहा, “हम लोगों को वहाँ जाना चाहिए और उस प्रदेश को अपने लिए लेना चाहिए। हम लोग उस प्रदेश को सरलता से ले सकते हैं।”
31 किन्तु जो उसके साथ गया था, वह बोला, “हम लोग उन लोगों के विरुद्ध लड़ नहीं सकते। वे हम लोगों की तुलना में अधिक शक्तिशाली हैं।” 32 और उन लोगों ने सभी इस्राएली लोगों से कहा कि उस प्रदेश के लोगों को पराजित करने के लिए वे पर्याप्त शक्तिशानी नहीं हैं उन्होंने कहा, “जिस प्रदेश को हम लोगों ने देखा, वह शक्तिशाली लोगों से भरा है। वे लोग इतने अधिक शक्तिशाली हैं कि जो कोई व्यक्ति वहाँ जाएगा उसे वे सरलता से हरा सकते हैं। 33 हम लोगों ने वहाँ नपीलियों को देखा! (अनाक के परिवार के लोग जो नपीलों के वंश के थे।) उनके सामने खड़े होने पर हम लोगों ने अपने आपको टिड्डा अनुभव किया। उन लोगों ने हम लोगों को ऐसे देखा मानो टिड्डे के समान छोटे हों।”