1मय यो कहू हय कि वारिस जब तक बच्चा हय, यानेकि ऊ सब चिजों को मालिक हय, तब भी ओको म अऊर सेवक म कोयी भेद नहाय। 2पर बाप को ठहरायो हुयो समय तक संरक्षको अऊर व्यवस्थापक को वश म रह्य हय। 3वसोच हम भी, जब बच्चा होतो त जगत कि सुरूवात की शिक्षा को वश म सेवक बन्यो हुयो होतो। 4पर जब समय पूरो भयो, त परमेश्वर न अपनो टुरा ख भेज्यो ऊ जो बाई सी जनम्यो, अऊर व्यवस्था को अधीन जीवत होतो, 5 ताकि हम जो व्यवस्था को अधीन हय उन्ख छुड़ाये, जेकोसी हम परमेश्वर को बेटा अऊर बेटी बन सके।
6अऊर तुम जो परमेश्वर को बेटा अऊर बेटी आय, येकोलायी परमेश्वर न अपनो टुरा की आत्मा ख, जो हे पिता, हे पिता, कह्य क पुकारय हय, हमरो दिलो म भेज्यो हय। 7येकोलायी तय अब सेवक नहाय, पर बेटा अऊर बेटी आय; अऊर जब बेटा भयो, त परमेश्वर को द्वारा वारिस भी भयो।
गलातियों को बारे म पौलुस की चिन्ता
8पर पहिले त तुम परमेश्वर ख नहीं जानत होतो अऊर उन्को तुम सेवक होतो जो वास्तव म ईश्वरीय नहाय, 9पर अब जो तुम न परमेश्वर ख पहिचान लियो बल्की परमेश्वर न तुम ख पहिचान लियो, त उन कमजोर अऊर बेकार अऊर सुरूवात की शिक्षा को तरफ फिरय हय, जिन्को तुम दुबारा सेवक होनो चाहवय हय? 10तुम कुछ विशेष दिनो अऊर महीनों अऊर मौसम अऊर सालो ख मानय हय। 11मय तुम्हरो बारे म चिन्तित हय, कहीं असो नहीं होय कि जो मेहनत मय न तुम्हरो लायी करयो ऊ बेकार ठहरे।
12हे भाऊवों अऊर बहिनों, मय तुम सी बिनती करू हय, तुम मोरो जसो होय जावो; कहालीकि मय भी तुम्हरो जसो भय गयो हय; तुम न मोरो संग कुछ अन्याय नहीं करयो। 13पर तुम जानय हय कि पहिली बार मय न शारीरिक कमजोरी को वजह तुम्ख सुसमाचार सुनायो। 14अऊर तुम न मोरी शारीरिक दशा ख जो तुम्हरी परीक्षा को वजह होती, तुच्छ नहीं जान्यो; अऊर परमेश्वर को दूत बल्की खुद मसीह यीशु को जसो मोख स्वीकार करयो। 15त ऊ तुम्हरी खुशी मनानो कित गयी? मय तुम्हरो गवाह हय कि यदि होय सकतो त तुम अपनी आंखी भी निकाल क मोख दे देतो। 16त का तुम सी सच बोलन को वजह मय तुम्हरो दुश्मन बन गयो हय?
17हि तुम्ख संगी बनानो त चाहवय हंय, पर भलो उद्देश सी नहीं; बल्की तुम्ख मोरो सी अलग करनो चाहवय हंय कि तुम उन्खच संगी बनाय लेवो। 18पर यो भी अच्छो हय कि भली बात म हर समय संगी बनावन म यत्न करयो जाय, नहीं केवल उच समय कि जब मय तुम्हरो संग रहू हय। 19हे मोरो बच्चा, जब तक तुम म मसीह को रूप नहीं बन जाये, तब तक मय तुम्हरो लायी फिर प्रसव जसी तकलीफ म हय। 20इच्छा त यो होवय हय, कि अब तुम्हरो जवर आय क अलग रीति सी बोलू, कहालीकि तुम्हरो बारे म मय चिन्तित हय।
सारा अऊर हाजिरा को उदाहरन
21तुम जो व्यवस्था को अधीन होनो चाहवय हय, मोरो सी कहो, का तुम व्यवस्था की नहीं सुनय? 22शास्त्र म लिख्यो हय, कि अब्राहम ख दोय टुरा भयो; एक दासी सी, अऊर एक स्वतंत्र बाई सी। 23पर जो दासी सी भयो, ऊ शारीरिक रीति सी जनम्यो; अऊर जो स्वतंत्र बाई सी भयो, ऊ प्रतिज्ञा को अनुसार जनम्यो। 24इन बातों म दृष्टान्त हय: हि बाईयां मानो दोय वाचा आय, एक त सीनै पहाड़ी की जेकोसी गुलाम पैदा होवय हय, अऊर वा हाजिरा आय। 25अऊर हाजिरा अरब को सीनै पहाड़ी आय, अऊर आधुनिक यरूशलेम ओको तुल्य हय, जो अपनो बच्चां समेत सेवक म हय। 26पर स्वर्ग को यरूशलेम स्वतंत्र हय, अऊर वा हमरी माय आय। 27कहालीकि शास्त्र म लिख्यो हय,
“हे बांझ, तय जो नहीं जानय खुशी मनाव;
जेक तकलीफ नहीं उठय, गलो खोल क जय जयकार कर;
कहालीकि छोड़ी हुयी की सन्तान
सुहागिन की सन्तान सी भी जादा हय।”
28हे भाऊवों अऊर बहिनों, हम इसहाक को जसो प्रतिज्ञा की सन्तान आय। 29अऊर जसो ऊ समय शरीर को अनुसार जनम्यो हुयो जो आत्मा को अनुसार जनम्यो हुयो ख सतावत होतो, वसोच अब भी होवय हय। 30पर पवित्र शास्त्र का कह्य हय? “दासी अऊर ओको बेटा ख निकाल दे, कहालीकि दासी को बेटा स्वतंत्र बाई को बेटा को संग उत्तराधिकारी नहीं होयेंन।” 31येकोलायी हे भाऊवों अऊर बहिनों, हम दासी को नहीं पर स्वतंत्र बाई की सन्तान आय।