उस वक़्त आसमान की बादशाही उन दस कुँवारियों की तरह होगी जो अपनी मशा'लें लेकर दुल्हा के इस्तक़बाल को निकलीं। उन में पाँच बेवक़ूफ़ और पाँच अक्लमन्द थीं। जो बेवक़ूफ़ थीं उन्होंने अपनी मशा'लें तो ले लीं मगर तेल अपने साथ न लिया। मगर अक्लमन्दों ने अपनी मशा'लों के साथ अपनी कुप्पियों में तेल भी ले लिया। और जब दुल्‍हा ने देर लगाई तो सब ऊँघने लगीं और सो गई। आधी रात को धूम मची‘देखो, दूल्हा आ गया, उसके इस्तक़बाल को निकलो!’ उस वक़्त वो सब कुंवारियाँ उठकर अपनी अपनी मशा'लों को दुरुस्त करने लगीं। और बेवक़ूफ़ों ने अक्लमन्दों से कहा ‘अपने तेल में से कुछ हम को भी दे दो। क्यूँकि हमारी मशा'लें बुझी जाती हैं।’ अक़्लमन्दों ने जवाब दिया, ‘शायद हमारे तुम्हारे दोनों के लिए काफ़ी न हो, बेहतर ये है कि बेचने वालों के पास जाकर, अपने लिए मोल ले लो।’ १०जब वो मोल लेने जा रही थी, तो दुल्हा आ पहुँचा और जो तैयार थीं, वो उस के साथ शादी के जशन में अन्दर चली गईं, और दरवाज़ा बन्द हो गया। ११फिर वो बाक़ी कुँवारियाँ भी आईं और कहने लगीं ‘ऐ ख़ुदावन्द ऐ ख़ुदावन्द। हमारे लिए दरवाज़ा खोल दे।’ १२उसने जवाब में कहा ‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि मैं तुम को नहीं जानता।’ १३पस जागते रहो, क्यूँकि तुम न उस दिन को जानते हो न उस वक़्त को। १४क्यूँकि ये उस आदमी जैसा हाल है, जिसने परदेस जाते वक़्त अपने घर के नौकरों को बुला कर अपना माल उनके सुपुर्द किया। १५एक को पाँच तोड़े दिए, दूसरे को दो, और तीसरे को एक या'नी हर एक को उसकी काबिलियत के मुताबिक़ दिया और परदेस चला गया। १६जिसको पाँच तोड़े मिले थे, उसने फ़ौरन जाकर उनसे लेन देन किया, और पाँच तोड़े और पैदा कर लिए। १७इसी तरह जिसे दो मिले थे, उसने भी दो और कमाए। १८मगर जिसको एक मिला था, उसने जाकर ज़मीन खोदी और अपने मालिक का रुपया छिपा दिया। १९बड़ी मुद्दत के बा'द उन नौकरों का मालिक आया और उनसे हिसाब लेने लगा। २०“ जिसको पाँच तोड़े मिले थे, वो पाँच तोड़े और लेकर आया, और कहा, तूने पाँच तोड़े मुझे सुपुर्द किए थे, “” देख मैंने पाँच तोड़े और कमाए।’ ” २१“ उसके मालिक ने उससे कहा, “” ऐ अच्छे और ईमानदार नौकर शाबाश; तू थोड़े में ईमानदार रहा मैं तुझे बहुत चीज़ों का मुख़्तार बनाउँगा; अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो।’ ” २२“ और जिस को दो तोड़े मिले थे, उस ने भी पास आकर कहा, तूने दो तोड़े मुझे सुपुर्द किए थे, “” देख मैंने दो तोड़े और कमाए।’ ” २३“ उसके मालिक ने उससे कहा, “” ऐ अच्छे और दियानतदार नौकर शाबाश; तू थोड़े में ईमानदार रहा मैं तुझे बहुत चीज़ों का मुख़्तार बनाउँगा; अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो।’ ” २४“ और जिसको एक तोड़ा मिला था, वो भी पास आकर कहने लगा, “” ऐ ख़ुदावन्द “” मैं तुझे जानता था, कि तू सख़्त आदमी है, और जहाँ नहीं बोया वहाँ से काटता है, और जहाँ नहीं बिखेरा वहाँ से जमा करता है। “ २५“ पस मैं डरा और जाकर तेरा तोड़ा ज़मीन में छिपा दिया, “” देख जो तेरा है वो मौजूद है।’ ” २६“ ‘उसके मालिक ने जवाब में उससे कहा,“”ऐ शरीर और सुस्त नौकर तू जानता था कि जहाँ मैंने नहीं बोया वहाँ से काटता हूँ, और जहाँ मैंने नहीं बिखेरा वहाँ से जमा करता हूँ। “ २७पस तुझे लाज़िम था,कि मेरा रुपया साहूकारों को देता, तो मैं आकर अपना माल सूद समेत ले लेता।’ २८पस इससे वो तोड़ा ले लो और जिस के पास दस तोड़े हैं‘ उसे दे दो। २९क्यूँकि जिस के पास है उसे दिया जाएगा और उस के पास ज्यादा हो जाएगा, मगर जिस के पास नहीं है उससे वो भी जो उसके पास है, ले लिया जाएगा। ३०और इस निकम्मे नौकर को बाहर अँधेरे में डाल दो, और वहाँ रोना और दाँत पीसना होगा।’ ३१जब इबने आदम अपने जलाल में आएगा, और सब फ़रिश्ते उसके साथ आएँगे; तब वो अपने जलाल के तख़्त पर बैठेगा। ३२और सब क़ौमें उस के सामने जमा की जाएँगी। और वो एक को दूसरे से जुदा करेगा। ३३और भेड़ों को अपने दाहिनें और बकरियों को बाँए जमा करेगा। ३४उस वक़्त बादशाह अपनी तरफ़ वालों से कहेगा‘आओ मेरे बाप के मुबारक लोगो, जो बादशाही दुनियां बनाने से पहले से तुम्हारे लिए तैयार की गई है उसे मीरास में ले लो। ३५क्यूँकि मैं भूखा था तुमने मुझे खाना खिलाया, मैं प्यासा था तुमने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेसी था तूने मुझे अपने घर में उतारा। ३६नंगा था तुमने मुझे कपड़ा पहनाया, बीमार था तुमने मेरी ख़बर ली ,मैं क़ैद में था, तुम मेरे पास आए।’ ३७तब रास्तबाज़ जवाब में उससे कहेंगे‘ऐ ख़ुदावन्द, हम ने कब तुझे भूखा देख कर खाना खिलाया, या प्यासा देख कर पानी पिलाया? ३८हम ने कब तुझे मुसाफिर देख कर अपने घर में उतारा? या नंगा देख कर कपड़ा पहनाया। ३९हम कब तुझे बीमार या क़ैद में देख कर तेरे पास आए।?’ ४०बादशाह जवाब में उन से कहेगा‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि तुम ने मेरे सब से छोटे भाइयों में से किसी के साथ ये सुलूक किया, तो मेरे ही साथ किया।’ ४१फिर वो बाएँ तरफ़ वालों से कहेगा, ‘मल'ऊनो मेरे सामने से उस हमेशा की आग में चले जाओ, जो इब्लीस और उसके फ़रिश्तों के लिए तैयार की गई है। ४२क्यूँकि, मैं भूखा था तुमने मुझे खाना न खिलाया, प्यासा था तुमने मुझे पानी न पिलाया। ४३मुसाफिर था तुम ने मुझे घर में न उतारा नंगा था, तुम ने मुझे कपड़ा न पहनाया, बीमार और क़ैद में था, तुम ने मेरी ख़बर न ली।’ ४४“ ‘तब वो भी जवाब में कहेंगे, “” ऐ ख़ुदावन्द “” हम ने कब तुझे भूखा,या प्यासा, या मुसाफिर,या नंगा, या बीमार या क़ैद में देखा कर तेरी ख़िदमत न की?’ ” ४५उस वक़्त वो उनसे जवाब में कहेगा‘मैं तुम से सच कहता हूँ ’कि जब तुम ने इन सब से छोटों में से किसी के साथ ये सुलूक न किया, तो मेरे साथ न किया। ४६और ये हमेशा की सज़ा पाएँगे, मगर रास्तबाज़ हमेशा की ज़िन्दगी।”