१इन बातों के बा'द मैंने आसमान पर गोया बड़ी जमा'अत को ऊँची आवाज़ से ये कहते सुना, “हेल्लिलुइयाह ! नजात और जलाल और क़ुदरत हमारे ख़ुदा की है | २क्यूँकि उसके फ़ैसले सहीह और दरुस्त हैं, इसलिए कि उसने उस बड़ी कस्बी का इन्साफ़ किया जिसने अपनी हरामकारी से दुनियाँ को ख़राब किया था, और उससे अपने बन्दों के ख़ून का बदला लिया |” ३फिर दूसरी बार उन्होंने कहा, “हल्लीलुइया ! और उसके जलने का धुवाँ हमेशा उठता रहेगा |” ४और चौबीसों बुज़ुर्गों और चारों जानदारों ने गिर कर ख़ुदा को सिज्दा किया, जो तख़्त पर बैठा था और कहा, “आमीन ! हल्लीलुइया !” ५और तख़्त में से ये आवाज़ निकली, “ऐ उससे डरनेवाले बन्दो !चाहे छोटे हो चाहे बड़े ! ६फिर मैंने बड़ी जमा'अत की सी आवाज़, और ज़ोर की सी आवाज़, और सख़्त गरजो की सी आवाज़ सुनी :” हल्लीलुइया ! इसलिए के ख़ुदावन्द हमारा ख़ुदा क़ादिर-ए-मुतलक़ बादशाही करता है | ७आओं, हम ख़ुशी करें और निहायत शादमान हों, और उसकी बड़ाई करें; इसलिए कि बर्रे की शादी आ पहुँची, और उसकी बीवी ने अपने आपको तैयार कर लिया; ८और उसको चमकदार और साफ़ महीन कतानी कपड़ा पहनने का इख़्तियार दिया गया, “ क्यूँकि महीन कतानी कपड़ों से मुक़द्दस लोगों की रास्तबाज़ी के काम मुराद हैं | ९और उसने मुझ से कहा, “लिख, मुबारक हैं वो जो बर्रे की शादी की दावत में बुलाए गए हैं |” फिर उसने मुझ से कहा, “ये ख़ुदा की सच्ची बातें हैं |” १०और मैं उसे सिज्दा करने के लिए उसके पाँव पर गिरा | उसने मुझ से कहा, “ख़बरदार ! ऐसा न कर | मैं भी तेरा और तेरे उन भाइयों का हमख़िदमत हूँ, जो ईसा ' की गवाही देने पर क़ायम हैं | ख़ुदा ही को सिज्दा कर |” क्यूँकि ईसा ' की गवाही नबुव्वत की रूह है | ११फिर मैंने आसमान को खुला हुआ, देखा, और क्या देखता हूँ कि एक सफ़ेद घोड़ा है; और उस पर एक सवार है जो सच्चा और बरहक़ कहलाता है, और वो सच्चाई के साथ इन्साफ़ और लड़ाई करता है | १२और उसकी आँखें आग के शो'ले हैं, और उसके सिर पर बहुत से ताज हैं | और उसका एक नाम लिखा हुआ है, जिसे उसके सिवा और कोई नहीं जानता | १३और वो ख़ून की छिड़की हुई पोशाक पहने हुए है, और उसका नाम कलाम-ए-ख़ुदा कहलाता है | १४और आसमान की फ़ौजें सफ़ेद घोड़ों पर सवार, और सफ़ेद और साफ़ महीन कतानी कपड़े पहने हुए उसके पीछे पीछे हैं | १५और क़ौमों के मारने के लिए उसके मुँह से एक तेज़ तलवार निकलती है; और वो लोहे की 'लाठी से उन पर हुकूमत करेगा, और क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा के तख़्त गज़ब की मय के हौज़ में अंगूर रौंदेगा | १६और उसकी पौशाक और रान पर ये नाम लिखा हुआ है : “बादशाहों का बादशाह और ख़ुदावन्दों का ख़ुदावन्द |” १७फिर मैंने एक फ़रिश्ते को आफ़ताब पर खड़े हुए देखा | और उसने बड़ी आवाज़ से चिल्ला कर आसमान में के सब उड़नेवाले परिन्दों से कहा, “आओं, ख़ुदा की बड़ी दावत में शरीक होने के लिए जमा' हो जाओ; १८ताकि तुम बादशाहों का गोश्त, और फ़ौजी सरदारों का गोश्त, और ताक़तवरों का गोश्त, और घोड़ों और उनके सवारों का गोश्त, और सब आदमियों का गोश्त खाओ; चाहे आज़ाद हों चाहे ग़ुलाम, चाहे छोटे हों चाहे बड़े |” १९फिर मैंने उस हैवान और ज़मीन के बादशाहों और उनकी फ़ौजों को, उस घोड़े के सवार और उसकी फ़ौज से जंग करने के लिए इकट्ठे देखा | २०और वो हैवान और उसके साथ वो झूटा नबी पकड़ा गया, जिनसे उसने हैवान की छाप लेनेवालों और उसके बुत की इबादत करनेवालों को गुमराह किया था | वो दोनों आग की उस झील में ज़िन्दा डाले गए, जो गंधक से जलती है | “ “ २१और बाक़ी उस घोड़े के सवार की तलवार से, जो उसके मुँह से निकलती थी क़त्ल किए गए; और सब परिन्दे उनके गोश्त से सेर हो गए |