क्षमा प्राप्ति की आशीष
दाऊद का भजन मश्कील
1क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध
क्षमा किया गया,
और जिसका पाप ढाँपा गया हो(रोम. 4:7)
2क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म
का यहोवा लेखा न ले,
और जिसकी आत्मा में कपट न हो। (रोम. 4:8)
3जब मैं चुप रहा
तब दिन भर कराहते-कराहते मेरी हड्डियाँ
पिघल गई।
4क्योंकि रात-दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा;
और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहट
बनती गई।
(सेला)
5जब मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया
और अपना अधर्म न छिपाया,
और कहा, “मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूँगा;”
तब तूने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
(सेला)
6इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय
में प्रार्थना करे जबकि तू मिल सकता है
निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तो भी
उस भक्त के पास न पहुँचेगी।
7तू मेरे छिपने का स्थान है;
तू संकट से मेरी रक्षा करेगा;
तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर
लेगा।
(सेला)
8मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे
चलना होगा उसमें तेरी अगुआई करूँगा;
मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा
और सम्मति दिया करूँगा।
9तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते,
उनकी उमंग लगाम और रास से रोकनी पड़ती है,
नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
10दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी;
परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है
वह करुणा से घिरा रहेगा।
11हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित
और मगन हो, और हे सब सीधे मनवालों
आनन्द से जयजयकार करो!

Notes


*32:1 32:1 जिसका पाप ढाँपा गया हो: ढाँक दिया गया अर्थात् छिपाया गया या गुप्त रखा गया दूसरे शब्दों में ऐसा ढाँका गया कि दिखाई नहीं देगा।

32:6 32:6 में प्रार्थना करे जबकि तू मिल सकता है: अर्थात् वे उसे दया या अनुग्रह का समय देखेंगे।