१इफ़िसुस की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख : “जो अपने दहने हाथ में सितारे लिए हुए है, और सोने के सातों चराग़दानों में फिरता है, वो ये फ़रमाया है कि | २“मैं तेरे काम और तेरी मशक़्क़त और तेरा सब्र तो जानता हूँ; और ये भी कि तू बदियों को देख नहीं सकता, और जो अपने आप को रसूल कहते हैं और हैं नही, तू ने उनको आज़मा कर झूटा पाया |” ३और तू सब्र करता है, और मेरे नाम की ख़ातिर मुसीबत उठाते उठाते थका नहीं | ४मगर मुझ को तुझ से ये शिकायत है कि तू ने अपनी पहली सी मुहब्बत छोड़ दी | ५पस ख़याल कर कि तू कहाँ से गिरा | और तौबा न करेगा, तो मैं तेरे पास आकर तेरे चिराग़दान को उसकी जगह से हटा दूँगा | ६अलबत्ता तुझ में ये बात तो है कि तू निकुलियों के कामों से नफ़रत रखता है, जिनसे मैं भी नफ़रत रखता हूँ | ७जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है | जो ग़ालिब आए, मैं उसे उस ज़िन्दगी के दरख़्त में से जो ख़ुदा की जन्नत में है, फल खाने को दूँगा | ८“और समुरना की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख : “जो अव्वल-ओ-आख़िर है, और जो मर गया था और ज़िन्दा हुआ, वो ये फ़रमाता है कि “ ९मैं तेरी मुसीबत और ग़रीबी को जानता हूँ (मगर तू दौलतमन्द है), और जो अपने आप को यहूदी कहते हैं, और हैं नहीं बल्कि शैतान के गिरोह हैं, उनके ला'न ता'न को भी जानता हूँ | १०जो दुख तुझे सहने होंगे उनसे ख़ौफ़ न कर ,देखो शैतान तुम में से कुछ को क़ैद में डालने को है ताकि तुम्हारी आज़माइश पूरी हो और दस दिन तक मुसीबत उठाओगे जान देने तक वफ़ादार रहो तो में तुझे ज़िन्दगी का ताज दूँगा| ११जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है | जो ग़ालिब आए, उसको दूसरी मौत से नुक्सान न पहुँचेगा | १२“और पिरगुमन की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख : “जिसके पास दोधारी तेज़ तलवार है, वो फ़रमाता है कि १३“मैं ये तो जानता हूँ कि शैतान की तख़्त गाह में सुकूनत रखता है, और मेरे नाम पर क़ायम रहता है; और जिन दिनों में मेरा वफ़ादार शहीद इन्तपास तुम में उस जगह क़त्ल हुआ था जहाँ शैतान रहता है, उन दिनों में भी तू ने मुझ पर ईमान रखने से इनकार नहीं किया | १४लेकिन मुझे चन्द बातों की तुझ से शिकायत है, इसलिए कि तेरे यहाँ कुछ लोग बिल'आम की ता'लीम माननेवाले हैं, जिसने बलक़ को बनी-ईसराइल के सामने ठोकर खिलाने वाली चीज़ रखने की ता'लीम दी, या'नी ये कि वो बुतों की क़ुर्बानियाँ खाएँ और हरामकारी करें | १५चुनाँचे तेरे यहाँ भी कुछ लोग इसी तरह नीकुलियों की ता'लीम के माननेवाले हैं | १६पस तौबा कर, नहीं तो मैं तेरे पास जल्द आकर अपने मुँह की तलवार से उनके साथ लडूंगा | १७जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है | जो ग़ालिब आएगा, मैं उसे पोशीदा मन में से दूँगा, और एक सफ़ेद पत्थर दूँगा | उस पत्थर पर एक नया नाम लिखा हुआ होगा, जिसे पानेवाले के सिवा कोई न जानेगा | १८“और थुवातीरा की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख :“ख़ुदा का बेटा जिसकी आँखें आग के शो'ले की तरह और पावँ ख़ालिस पीतल की तरह हैं, ये फ़रमाता है कि १९“मैं तेरे कामों और मुहब्बत और ईमान और ख़िदमत और सब्र को तो जानता हूँ, और ये भी कि तेरे पिछले काम पहले कामों से ज़्यादा हैं | २०पर मुझे तुझ से ये शिकायत है कि तू ने उस औरत ईज़बिल को रहने दिया है जो अपने आपको नबिया कहती है, और मेरे बन्दों को हरामकारी करने और बुतों की क़ुर्बानियाँ खाने की ता'लीम देकर गुमराह करती है २१मैंने उसको तौबा करने की मुहलत दी, मगर वो अपनी हरामकारी से तौबा करना नहीं चाहती | २२देख, मैं उसको बिस्तर पर डालता हूँ; और जो ज़िना करते हैं अगर उसके से कामों से तौबा न करें, तो उनको बड़ी मुसीबत में फँसाता हूँ; २३और उसके फ़र्ज़न्दों को जान से मारूँगा, और सब कलीसियाओं को मा'लूम होगा कि गुर्दों और दिलों का जाचँने वाला मैं ही हूँ, और मैं तुम में से हर एक को उसके कामों के जैसा बदला दूँगा | २४मगर तुम थुवातीरा के बाक़ी लोगों से, जो उस ता'लीम को नहीं मानते और उन बातों से जिन्हें लोग शैतान की गहरी बातें कहते हैं ना जानते हो, ये कहता हूँ कि तुम पर और बोझ न डालूँगा | २५अलबत्ता, जो तुम्हारे पास है, मेरे आने तक उसको थामे रहो | २६जो ग़ालिब आए और जो मेरे कामों के जैसा आख़िर तक 'अमल करे, मैं उसे क़ौमों पर इख़्तियार दूँगा; २७और वो लोहे के 'असा से उन पर हुकूमत करेगा, जिस तरह कि कुम्हार के बर्तन चकना चूर हो जाते हैं : चुनाँचे मैंने भी ऐसा इख़्तियार अपने बाप से पाया है, २८और मैं उसे सुबह का सितारा दूँगा | २९जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |