फिर उसने इस गरज से कि हर वक़्त दू'आ करते रहना और हिम्मत न हारना चाहिए, उसने ये मिसाल कही : “ ““किसी शहर में एक क़ाजी था, न वो खुदा से डरता, न आदमी की कुछ परवाह करता था |” और उसी शहर में एक बेवा थी, जो उसके पास आकर ये कहा करती थी, 'मेरा इन्साफ करके मुझे मुद्द'ई से बचा |' उसने कुछ 'अरसे तक तो न चाहा, लेकिन आखिर उसने अपने जी में कहा, 'गरचे मैं न खुदा से डरता और न आदमियों की कुछ परवा करता हूँ | “ तोभी इसलिए कि ये बेवा मुझे सताती है, मैं इसका इन्साफ करूँगा; ऐसा न हो कि ये बार-बार आकर आखिर को मेरी नाक में दम करे '|""” “ खुदावन्द ने कहा, ““सुनो ये बेइन्साफ क़ाज़ी क्या कहता है ?” पस क्या खुदा अपने चुने हुए का इन्साफ न करेगा, जो रात दिन उससे फरियाद करते हैं ? मैं तुम से कहता हूँ कि वो जल्द उनका इन्साफ करेगा | तोभी जब इब्न-ए-आदम आएगा, तो क्या ज़मीन पर ईमान पाएगा? फिर उसने कुछ लोगों से जो अपने पर भरोसा रखते थे, कि हम रास्तबाज़ हैं और बाक़ी आदमियों को नाचीज़ जानते थे, ये मिसाल कही, १०“ ““दो शख्स हैकल में दुआ करने गए: एक फरीसी, दूसरा महसूल लेनेवाला |” ११फरीसी खड़ा होकर अपने जी में यूँ दू'आ करने लगा, 'ऐ खुदा मैं तेरा शुक्र करता हूँ कि बाकी आदमियों की तरह ज़ालिम, बेइन्साफ, ज़िनाकर या इस महसूल लेनेवाले की तरह नहीं हूँ | १२मैं हफ्ते में दो बार रोज़ा रखता, और अपनी सारी आमदनी पर दसवां हिस्सा देता हूँ |' १३“लेकिन महसूल लेने वाले ने दूर खड़े होकर इतना भी न चाहा कि आसमान की तरफ आँख उठाए,बल्कि छाती पीट पीट कर कहा ऐ खुदा|,मुझ गुनहगार पर रहम कर |’ १४“ मैं तुम से कहता हूँ कि ये शख्स दुसरे की निस्बत रास्तबाज ठहरकर अपने घर गया, क्यूँकि जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा वो छोटा किया जाएगा और जो अपने आपको छोटा बनाएगा वो बड़ा किया जाएगा |""” १५फिर लोग अपने छोटे बच्चों को भी उसके पास लाने लगे ताकि वो उनको छूए; और शागिर्दों ने देखकर उनको झिड़का | १६“ मगर ईसा' ने बच्चों को अपने पास बुलाया और कहा, ““बच्चों को मेरे पास आने दो, और उन्हें मना' न करो; क्यूँकि खुदा की बादशाही ऐंसों ही की है |” १७“ मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो कोई खुदा की बादशाही को बच्चे की तरह क़ुबूल न करे, वो उसमें हरगिज़ दाखिल न होगा |""” १८“ फिर किसी सरदार ने उससे ये सवाल किया, ““ऐ उस्ताद ! मैं क्या करूँ ताकि हमेशा की ज़िन्दगी का वारिस बनूँ |” १९“ ईसा' ने उससे कहा, ““तू मुझे क्यूँ नेक कहता है ? कोई नेक नहीं, मगर एक या'नी खुदा |” २०“ तू हुक्मों को जानता है : ज़िना न कर,खून न कर, चोरी न कर, झूटी गवाही न दे; अपने बाप और माँ की 'इज़्ज़त कर |""” २१“ उसने कहा, ““मैंने लड़कपन से इन सब पर 'अमल किया है |""” २२“ ईसा' ने ये सुनकर उससे कहा, ““अभी तक तुझ में एक बात की कमी है, अपना सब कुछ बेचकर गरीबों को बाँट दे; तुझे आसमान पर खज़ाना मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले |""” २३ये सुन कर वो बहुत गमगीन हुआ, क्यूँकि बड़ा दौलतमन्द था | २४“ ईसा' ने उसको देखकर कहा, ““दौलतमन्द का खुदा की बादशाही में दाखिल होना कैसा मुश्किल है !” २५“ क्यूँकि ऊँट का सूई के नाके में से निकल जाना इससे आसान है, कि दौलतमन्द खुदा की बादशाही में दाखिल हो |""” २६“ सुनने वालो ने कहा, ““तो फिर कौन नजात पा सकता है?|” २७“ उसने कहा, ““जो इन्सान से नहीं हो सकता, वो खुदा से हो सकता है |""” २८“ पतरस ने कहा, ““देख ! हम तो अपना घर-बार छोड़कर तेरे पीछे हो लिए हैं |""” २९उसने उनसे कहा, 'मैं तुम से सच कहता हूँ, कि ऐसा कोई नहीं जिसने घर या बीवी या भाइयों या माँ बाप या बच्चों को खुदा की बादशाही की खातिर छोड़ दिया हो; ३०“ और इस ज़माने में कई गुना ज़्यादा न पाए, और आने वाले 'आलम में हमेशा की ज़िन्दगी |""” ३१“ फिर उसने उन बारह को साथ लेकर उनसे कहा, ““देखो, हम यरूशलीम को जाते हैं, और जितनी बातें नबियों के ज़रिये लिखी गईं हैं, इब्न-ए-आदम के हक में पूरी होंगी |” ३२क्यूँकि वो गैर कौम वालों के हवाले किया जाएगा; और लोग उसको ठटठों में उड़ाएँगे और बे'इज्ज़त करेंगे, और उस पर थूकेगे, ३३और उसको कोड़े मारेंगे और कत्ल करेंगे और वो तीसरे दिन जी उठेगा | ३४लेकिन उन्होंने इनमें से कोई बात न समझी, और ये कलाम उन पर छिपा रहा और इन बातों का मतलब उनकी समझ में न आया | ३५जो वो चलते-चलते यरीहू के नज़दीक पहुँचा, तो ऐसा हुआ कि एक अन्धा रास्ते के किनारे बैठा हुआ भीख माँग रहा था | ३६“ वो भीड़ के जाने की आवाज़ सुनकर पूछने लगा, ““ये क्या हो रहा है?"”” ३७“ उन्होंने उसे ख़बर दी, ““ईसा' नासरी जा रहा है |""” ३८“ उसने चिल्लाकर कहा, ““ऐ ईसा' इब्न-ए-दाऊद, मुझ पर रहम कर !""” ३९“ जो आगे जाते थे, वो उसको डाँटने लगे कि चुप रह; मगर वो और भी चिल्लाया, 'ऐ इब्न-ए-दा,ऊद, मुझ पर रहम कर !""” ४०'ईसा' ने खड़े होकर हुक्म दिया कि उसको मेरे पास ले आओ,जब वो नज़दीक आया तो उसने उससे ये पूंछा| ४१“ ““तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ? उसने कहा, ““ऐ खुदावन्द ! मैं देखने लगूं |""” ४२“ ईसा' ने उससे कहा, ““बीना हो जा, तेरे ईमान ने तुझे अच्छा किया, “"” ४३“ वो उसी वक़्त देखने लगा, और खुदा की बड़ाई करता हुआ उसके पीछे हो लिया; और सब लोगों ने देखकर खुदा की तारीफ की | “” “"”