१क़ैसरिया में कुर्नेलियुस नाम एक शख़्स था। वह उस पलटन का सूबेदार था, जो अतालियानी कहलाती है। २वो दीनदार था, और अपने सारे घराने समेत ख़ुदा से डरता था, और यहूदियों को बहुत ख़ैरात देता और हर वक़्त ख़ुदा से दु'आ करता था ३उस ने तीसरे पहर के क़रीब रोया में साफ़ साफ़ देखा कि ख़ुदा का फ़रिश्ता मेरे पास आकर कहता है, “कुर्नेलियुस!” ४उसने उस को ग़ौर से देखा और डर कर कहा “ख़ुदावन्द क्या है?” उस ने उस से कहा, “तेरी दु'आएँ और तेरी ख़ैरात यादगारी के लिए ख़ुदा के हुज़ूर पहुँचीं। ५अब याफ़ा में आदमी भेजकर शमा'ऊन को जो पतरस कहलाता है, बुलवा ले। ६वो शमा'ऊन दब्बाग़ के यहाँ मेंहमान है, जिसका घर समुन्दर के किनारे है ।” ७और जब वो फ़रिश्ता चला गया जिस ने उस से बातें की थी, तो उस ने दो नौकरों को और उन में से जो उसके पास हाज़िर रहा करते थे, एक दीनदार सिपाही को बुलाया। ८और सब बातें उन से बयान कर के उन्हें याफ़ा में भेजा। ९दूसरे दिन जब वो राह में थे, और शहर के नज़दीक पहुँचे तो पतरस दोपहर के क़रीब छत पर दु'आ करने को चढ़ा। १०और उसे भूख लगी, और कुछ खाना चहता था, लेकिन जब लोग तैयारी कर रहे थे, तो उस पर बेख़ुदी छा गई। ११और उस ने देखा कि आस्मान खुल गया और एक चीज़ बड़ी चादर की तरह चारों कोनों से लटकती हुई ज़मीन की तरफ़ उतर रही है । १२जिसमें ज़मीन के सब क़िस्म के चौपाए, कीड़े मकोड़े और हवा के परिन्दे हैं । १३और उसे एक आवाज़ आई कि ऐ पतरस, उठ ज़बह कर और खा, १४मगर पतरस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द हरगिज़ नहीं क्यूँकि में ने कभी कोई हराम या नापाक़ चीज़ नहीं खाई।” १५फिर दूसरी बार उसे आवाज़ आई, कि “जिनको ख़ुदा ने पाक ठहराया है तू उन्हें हराम न कह” १६तीन बार ऐसा ही हुआ, और फ़ौरन वो चीज़ आसमान पर उठा ली गई। १७जब पतरस अपने दिल में हैरान हो रहा था, कि ये रोया जो में ने देखी क्या है, तो देखो वो आदमी जिन्हें कुर्नेलियुस ने भेजा था, शमा'ऊन के घर पूछ कर के दरवाज़े पर आ खड़े हुए । १८और पुकार कर पूछने लगे कि शमा'ऊन जो पतरस कहलाता है? “यही मेंहमान है ” १९जब पतरस उस ख़्वाब को सोच रहा था, तो रूह ने उस से कहा देख तीन आदमी तुझे पूछ रहे हैं। २०पस, उठ कर नीचे जा और बे -खटक उनके साथ हो ले ; क्यूँकि मैं ने ही उनको भेजा है । २१पतरस ने उतर कर उन आदमियों से कहा, “देखो जिसको तुम पूछते हो वो मैं ही हूँ तुम किस वजह से आये हो|” २२उन्होंने कहा, “कुर्नेलियुस सूबेदार जो रास्तबाज़ और ख़ुदा तरस आदमी और यहूदियों की सारी क़ौम में नेक नाम है उस ने पाक़ फ़रिश्ते से हिदायत पाई कि तुझे अपने घर बुलाकर तुझ से कलाम सुने।” २३पस उस ने उन्हें अन्दर बुला कर उनकी मेंहमानी की, और दूसरे दिन वो उठ कर उनके साथ रवाना हुआ, और याफ़ा में से कुछ भाई उसके साथ हो लिए। २४वो दूसरे रोज़ क़ैसरिया में दाख़िल हुए, और कुर्नेलियुस अपने रिश्तेदारों और दिली दोस्तों को जमा कर के उनकी राह देख रहा था । २५जब पतरस अन्दर आने लगा तो ऐसा हुआ कि कुर्नेलियुस ने उसका इस्तक़बाल किया और उसके क़दमों में गिर कर सिज्दा किया। २६लेकिन पतरस ने उसे उठा कर कहा खड़ा हो, “ मैं भी तो इन्सान हूँ।” २७और उससे बातें करता हुआ अन्दर गया और बहुत से लोगों को इकट्ठा पा कर। २८उनसे कहा तुम तो जानते हो कि “यहूदी को ग़ैर क़ौम वाले से सोहबत रखना या उसके यहाँ जाना ना जायज़ है मगर “ख़ुदा” ने मुझ पर ज़ाहिर किया कि मैं किसी आदमी को नजिस या नापाक़ न कहूँ। २९इसी लिए जब मैं बुलाया गया तो बे' उज़्र चला आया, पस अब मैं पूछता हूँ कि मुझे किस बात के लिए बुलाया है ?” ३०कुर्नेलियुस ने कहा “इस वक़्त पूरे चार रोज़ हुए कि मैं अपने घर तीसरे पहर दु'आ कर रहा था। और क्या देखता हूँ। कि एक शख़्स चमकदार पोशाक पहने हुए मेरे सामने खड़ा हुआ ।” ३१और कहा कि “ऐ'कुर्नेलियुस तेरी दु'आ सुन ली गई और तेरी ख़ैरात की ख़ुदा के हुज़ूर याद हुई। ३२पस किसी को याफ़ा में भेज कर शमा'ऊन को जो पतरस कहलाता है अपने पास बुला, वो समुन्दर के किनारे शमा'ऊन दब्बाग़ के घर में मेंहमान है। ३३पस उसी दम में ने तेरे पास आदमी भेजे और तूने ख़ूब किया जो आ गया, अब हम सब ख़ुदा के हुज़ूर हाज़िर हैं ताकि जो कुछ ख़ुदावन्द ने फ़रमाया है उसे सुनें।” ३४पतरस ने ज़बान खोल कर कहा, “अब मुझे पूरा यक़ीन हो गया कि ख़ुदा किसी का तरफ़दार नहीं| ३५बल्कि हर क़ौम में जो उस से डरता और रास्तबाज़ी करता है, वो उसको पसन्द आता है। ३६जो कलाम उस ने बनी इस्राईल के पास भेजा, जब कि ईसा' मसीह के ज़रिये जो सब का ख़ुदा है, सुलह की ख़ुशख़बरी दी। ३७इस बात को तुम जानते हो जो यूहन्ना के बपतिस्मे की मनादी के बा'द गलील से शुरू होकर तमाम यहूदिया में मशहूर हो गई । ३८कि ख़ुदा ने ईसा' नासरी को रूह -उल -क़ुद्दूस और क़ुदरत से किस तरह मसह किया, वो भलाई करता और उन सब को जो इब्लीस के हाथ से ज़ुल्म उठाते थे शिफ़ा देता फिरा, क्यूकि ख़ुदा उसके साथ था। ३९और हम उन सब कामों के गवाह हैं, जो उस ने यहूदियों के मुल्क और यरूशलीम में किए, और उन्हों ने उस को सलीब पर लटका कर मार डाला । ४०उस को ख़ुदा ने तीसरे दिन जिलाया और ज़ाहिर भी कर दिया। ४१न कि सारी उम्मत पर बल्कि उन गवाहों पर जो आगे से ख़ुदा के चुने हुए थे, या'नी हम पर जिन्हों ने उसके मुर्दों में से जी उठने कि बा'द उसके साथ खाया पिया। ४२और उस ने हमें हुक्म दिया कि उम्मत में ऐलान करो और गवाही दो कि ये वही है जो ख़ुदा की तरफ़ से ज़िन्दों और मुर्दों का मुन्सिफ़ मुक़र्रर किया गया। ४३इस शख़्स की सब नबी गवाही देते हैं, कि जो कोई उस पर ईमान लाऐगा, उस के नाम से गुनाहों की मु'आफ़ी हासिल करेगा।” ४४पतरस ये बातें कह ही रहा था, कि रूह -उल -क़ुद्दूस उन सब पर नाज़िल हुआ, जो कलाम सुन रहे थे। ४५और पतरस के साथ जितने मख़्तून ईमानदार आए थे, वो सब हैरान हुए कि ग़ैर क़ौमों पर भी रूह-उल-क़ुद्दूस की बख़्शिश जारी हुई। ४६क्यूँकि उन्हें तरह तरह की ज़बानें बोलते और ख़ुदा की तारीफ़ करते सुना; पतरस ने जवाब दिया। ४७“क्या कोई पानी से रोक सकता है, कि बपतिस्मा न पाएँ, जिन्हों ने हमारी तरह रूह -उल -क़ुद्दूस पाया ?” ४८और उस ने हुक्म दिया कि “उन्हें ईसा' मसीह के नाम से बपतिस्मा दिया जाए इस पर उन्हों ने उस से दरख़्वास्त की कि चन्द रोज़ हमारे पास रह।”